सुपौल जिले में बुजुर्ग किसान कर रहे देशी जैविक कीटनाशक का निर्माण , देखें रिपोर्ट

रासायनिक कीटनाशक के बढ़ते दाम एवं इनके दुष्प्रभाव को देखते हुए किसानों ने विकल्प के रूप में खुद से देसी कीटनाशक का निर्माण शुरू कर दिया है। किसानों की यह अनूठी पहल धीरे- धीरे रंग ला रही है। किसान अब बहुतायत में फसलों के साथ-साथ फल एवं सब्जी की खेती में भी इस देशी कीटनाशक का उपयोग करने लगे हैं।

अक्षयवट बुजुर्ग महासंघ के सहयोग एवं तकनीकी जानकारी से लाभान्वित होकर बसंतपुर प्रखंड के संस्कृत निर्मली एवं राघोपुर प्रखंड के बुजुर्ग किसानों ने यह कीटनाशक का निर्माण शुरू किया है। कम लागत में अधिक मात्रा में कीटनाशक का उपयोग एवं इनके फायदे देखकर आसपास के गांवों के किसान भी इस तरफ आकर्षित होने लगे हैं।

देसी कीटनाशक के निर्माण में जुटे किसान कृष्णदेव मेहता, सकलदेव मेहता, लक्ष्मी चौपाल, रमेश मेहता, महेशलाल मेहता, सुन्दर मेहता, अरुण मेहता आदि ने बताया कि अच्छी फसलों के लिए पहले तो वे खुद भी रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया। लेकिन जहरीली खेती के जनस्वास्थ्य पर प्रभाव और पर्यावरण के लिए बढ़ते दुष्परिणामों को जाना तो उनकी सोच ही बदल गई। पहले खुद रसायनमुक्त खेती और देसी कीटनाशकों से अच्छा लाभ पाया तो खुद से जैविक कीटनाशक तैयार करने लगे। इसके बाद वह अब दूसरे किसानों को भी रसायनमुक्त खेती का मंत्र दे रहे हैं।

कैसे तैयार करते हैं जैविक कीटनाशक ?

जैविक कीटनाशक तैयार करने के बारे में जानकारी देते हुए यहां के किसानों ने बताया कि इसके निर्माण की विधि सरल एवं सस्ती है। दो किलो लहसून, दो किलो हरी मिर्च, दो किलो खैनी पत्ता एवं दो किलो नीम के पत्ते को कूट कर इसे 20 लीटर गो मूत्र में करीब एक घंटे तक उबाला जाता है। जब यह करीब 12 लीटर के करीब हो जाता है तो इसे आंच पर से उतारकर दो दिन के लिए छोड़ दिया जाता है। दो दिन के बाद इसे छानकर फसल, फल या सब्जी में छिड़काव कर सकते हैं। किसानों ने बताया कि 12 लीटर तैयार कीटनाशक से डेढ़ फूट से ऊपर की फसलों में तीन से चार एकड़ तक में छिड़काव कर सकते हैं। वहीं डेढ़ फूट से छोटी फसल या सब्जी में चार से पांच एकड़ तक में छिड़काव कर सकते हैं।

किसानों के लिए उपयोगी जिला किसान संघ के प्रवक्ता एवं कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर से सम्मानित किसान प्रशांत कुमार कहते हैं कि यह कीटनाशक बहुत ही उपयोगी है। इस में प्रयोग की गई सभी चीजें आसानी से एवं इस क्षेत्र में भरपूर उपलब्ध है। इस जैविक कीटनाशक का लागत कम करने के लिए हरी मिर्च की जगह पर वन मिर्ची के पत्ते को भी लिया जा सकता है।

Ujjwal Kumar Singh

Hey I m Ujjwal Kumar Singh; a Student + Student Leader , Blogger , Web Developer , Digital Marketer , Affiliate Marketer , Politician , Social Media Advisor etc. For Knowing better of me:- search "uksb7491" on Google.

Post a Comment

Previous Post Next Post